बुधवार, 24 नवंबर 2010

वकील करो-

वकील करो
वकील करो-
अपने हक के लिए लड़ो
नहीं तो जाओमरो
2
रटो, ऊँचे स्वर में,
बातें ऊँची-ऊँचीन सही दैनिक पत्रों से लेकर,
खादी के उजले मंचों सेदिन के,
तो रेस्तराओं-गोष्ठियों में हीउन्हें सुनाते पाये जाओ,
बड़े-बड़े नेताओं के नामगाते पाए जाओ!
फिरहो अगर हिम्मत तोडटो :
यानी-के चोर बाजार मेंअपनी
साखजमाओ खिलाओ हज़ारों, तोलाखों कमाओ!
और क्या, हाँ, फिरसट्टे-फ़स्ट क्लास होटेल-
ठेके-या कि एलेक्शन मेंपूंजी लगाओ,
और दो... ‘बड़े-बड़ों’ के बीच में बैठकर...
शान से मूँछों पर ताव!
हाँ, कानी उँगली पे अपनी गाँधी-टोपीनचाए,
नचाए, नचाए जाओ!
3
और आर्ट-क्या है ?
औरतकी जवानी केसौ बहाने :
उसकेसौ‘
फ़ॉर्म’:
जो उसपे झूमे,
अदा करोवही पार्ट :
-इसका भी एक बाज़ार हैसमझे न ?
ब्यूटी मार्ट
इसके माने:नये से नये मरोड़दोरंगों को अंगों कोजिस्म-
सीफिसलतीलाइनों कोसीने में घुलतेशेडों को
इसमें भी, खोजो तो,
गहरे से गहरेआदिमनशों का तोड़है,
समझे इस कला कीफ़िलासफ़ी?
इसी शराब केदौर चलाओ,
और ‘आगे’और ‘आगे’और ‘आगे’जाओ-जाओ !
और देश को ले जाओ(पता नहीं कहाँ !)
समझे, मेरेअत्याधुनिक भाई

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