भारत गणतंत्र सेल पर लगा है। बड़े बड़े बैनर मौजूद है जो हमे बता रहे हैं कि भारत देश का कौन सा हिस्सा आप कितने में और किससे खरीद सकते हैं। सांसद बिक रहे हैं, लाइसेंस बिक रहे हैं, शपथ पत्र बिक रहे हैं, पहाड़, सागर और खदाने बिक रही है, जो बिक सकता है वो बिक रहा है। दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र परचून की दुकान हो गया है। तराजू पर बैठ कर डंडी मारने वाले अलग अलग चेहरे हैं और इस समय नीरा राडिया का चेहरा सबसे ज्यादा चर्चा में है। नीरा राडिया दुनिया भर में घूमने वाली और दुनिया के सबसे अमीर लोगों को तुम कह कर बुलाने वाली नारी है और उसके नारी होने में न उसका कोई श्रेय हैं और न दोष। सफल लोग व्यक्तित्वों और लिंग भेदों की सीमा से बाहर निकल जाते हैं। नीरा राडिया को उसके लगभग एक साल से चर्चित कर्मों और अपकर्मों के लिए सवाल करने का अवसर खोजा जा रहा था मगर जब इस महादलाल के उप दलालों के टेप सार्वजनिक हो गए और अभी करीब पचपन घंटे के टेप तो सुने ही नहीं गए हैं तो जा कर प्रवर्तन निदेशालय को याद आया कि नीरा राडिया से बात करनी है। एक जमाना था जब नेहरू जी और इंदिरा गांधी के काल में कोटा, परमिट, लाइसेंस राज बहुत सुना जाता था। सीमेंट, सरिया और पत्थर तो छोड़िए, रेडियो सुनने का भी लाइसेंस लगता था। जहां लाइसेंस चाहिए वहां फीस भी देनी पड़ती है। कुछ की रसीद मिलती है और कुछ की नहीं मिलती। मनमोहन सिंह जब फिरंगी शैली में अपने सनातन भारत देश की व्यापार और अर्थव्यवस्था की गति पर आ गए तो ये कोटा परमिट लाइसेंस तो खारिज हो गए मगर उनकी जगह एक नई कॉरपोरेट संस्कृति ने ली जहां सब कुछ और ज्यादा बेशर्मी से बिकता था। सब बाजार में हाजिर हैं, सही सेल्समैंन और चतुर खरीददार चाहिए। अवसर का फायदा उठाने के लिए हर वर्ग से लोग मौजूद हैं। लोगों को आदर्शों का पाठ पढ़ाने वाले हमारे पत्रकार साथी भी हैं, होटलों को हार्डवेयर कहने वाले सरकारी अफसर भी हैं, मंत्री बनने के लिए एक दलाल से घंटो गिड़गिड़ाने वाले नेता भी हैं और अब तो ऐसे प्रधानमंत्री भी हैं जिनसे देश की सबसे बड़ी अदालत उनके कर्मो के लिए सफाई मांग सकती है और मांगती है। नीरा राडिया से पूछताछ अभी चलेगी और कोई आश्चर्य नहीं कि अपनी खाल बचाने के लिए राडिया को गिरफ्तार कर के जेल में भी डाल दिया जाए। ऐसा नहीं कि नीरा राडिया बहुत बड़ी पुण्य आत्मा है और उनके जेल जाने से प्रलय आ जाएगी मगर सवाल उस मानसिकता का है जिसमें देश को उपभोक्ता वस्तु मान लिया गया है और बिकने के लिए उपलब्ध करवा दिया गया है। कल हर्षद मेहता था, केतन पारिख था, धीरेंद्र ब्रह्मचारी था और आज नीरा राडिया हैं। उस समय भी उनके आसपास लोग मंडराते थे और आज भी मंडराते हैं। इनसे प्रेरणा पा कर देश की दलाली करने वालों की एक पूरी पीढ़ी तैयार हो रही है। नीरा राडिया का फोन आयकर वालों ने टेप किया। गृह मंत्रालय की अनुमति चाहिए थी इसलिए वह मांग ली गई। लेकिन सच यह है कि इस टेप रिकॉर्डिंग से जो निकल कर आया है वह ज्यादा आयकर वालों के मतलब का नहीं है। इसमें तो दलालाें के चेहरे उजागर हो रहे हैं और नीरा राडिया ने पहले ही दिन अपनी कंपनी वैष्णवी कम्युनिकेशंस से ले कर निजी और दूसरे खातों के इनकम टेक्स रिकॉर्ड जमा करा दिए। आयकर वालों के पास इसके बाद नीरा राडिया के लिए कोई आरोप पत्र बचा ही नहीं रह जाता। हमारे मिस्टर क्लीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बेदाग और ईमानदारी की मूर्ति बनाने के लिए आखिरकार खुद सोनिया गांधी को गरजना पड़ा। उनकी मजबूरी थी। जो आदमी नगरपालिका का चुनाव नहीं जीत पाता उसे एक दम पारसी थिएटर के अंदाज में सोनिया गांधी ने देश का प्रधानमंत्री बना दिया और अच्छे बच्चे अपने खिलौनों की सुरक्षा खुद करते हैं। श्रीमती गांधी भी हमारे खिलौना प्रधानमंत्री की रक्षा में लगी हुई है। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि देश के किसी और प्रधानमंत्री के राजकाज में इतने ज्यादा और इतने धारावाहिक घोटाले नहीं हुए जितने हमारे बेदाग प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के जमाने में हुए। कोई नहीं कहेगा कि खुद मनमोहन सिंह नीरा राडिया के दलालों में या ग्राहकों में शामिल हैं। नीरा राडिया ने खुद भी कभी दावा नहीं किया कि उनकी जान पहचान सीधे भारत के प्रधानमंत्री से हैं लेकिन अगर सफल और साफ प्रशासन का श्रेय देश के शासक को मिलता है तो पाप के इन दस्तावेजों पर हमारे प्रधानमंत्री का अंगूठा क्यों नहीं लगवाया जा सकता? राडिया और टू जी स्पेक्ट्र वाला मामला सामने इसलिए ही आ पाया क्योंकि इसमें हजारों करोड़ का खेल था और जो लोग हजारों करोड़ के खेल कर सकते हैं वे एक दूसरे को नंगा करने में कितनी देर लगाएंगे?ए राजा, नीरा राडिया, दयानिधि मारन, रतन टाटा, अनिल और मुकेश अंबानी सबके नाम सामने आए ही इसलिए क्याेंकि सबके पास एक दूसरे को निर्वसन करने के साधन मौजूद थे। यह भारत की कलंक कथा का अंत नहीं है बल्कि सिर्फ एक और बड़ी कलंक कथा है और सबसे बड़ी बात तो यह है कि अभी तक इसे भारत के इतिहास का आंकड़ों के हिसाब से सबसे बड़ा घोटाला कहा जा रहा है मगर अगला घोटाला कब इसे विस्थापित कर देगा यह कौन कह सकता है? नटवर लाल को हर्षद मेहता ने, हर्षद मेहता को अब्दुल करीम तेलगी ने, तेलगी को केतन पारिख ने और केतन पारिख को नीरा राडिया ने विस्थापित किया है और अब अपने देश को न चौकने की आदत पड़ गई है। इसलिए ये कहानियां होती रहेगी। ईमानदारी और मानवीय गुणो के सबसे ज्यादा मंत्र और भाष्य शायद भारतीय ग्रंथो में ही मौजूद हैं लेकिन अब अपना समाज भाष्यों से नहीं बल्कि जमीनी हकीकतों से चलता है और ये हकीकते अलग अलग सम्मानित माने जाने वाले पेशें में बैठे महापुरुषाें को बाकी समाज से ज्यादा पता है। हम और आप तो सिर्फ सपना देख सकते हैं कि सब कुछ वैसे ही होगा जैसे उसका होना चाहिए मगर हम और आप भी वहीं हैं जो रेल में सीट पक्की कराने के लिए टीटी को पैसा खिलाने से नहीं चूकते और अपने दरवाजे पर कूड़ा जमा नहीं रहे इसके लिए कमेटी के जमादार को रिश्वत भी खिलाते हैं।
साभार..डेट लाइन इंडिया com
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