रविवार, 5 दिसंबर 2010
उच्च न्ययालय पहुंचे प्रभु श्री राम
जन्मभूमि के बंटवारे के आदेश के खिलाफ भगवान श्रीराम विराजमान सुप्रीम कोर्ट पहंुच गए हैं। भगवान की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई अपील में जन्मभूमि की जमीन का तीन हिस्सों में बंटवारा करने के हाईकोर्ट के फैसले को निरस्त करने की मांग की गई है। अपील में कहा गया है कि भगवान का बंटवारा नहीं हो सकता। इलाहबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने गत 30 सितंबर को दो -एक के बहुमत से फैसला सुनाते हुए जन्मभूमि को तीन बराबर के हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था। इसमें एक हिस्सा भगवान राम विराजमान को मिला था दूसरा निर्माेही अखाड़े को और तीसरा हिस्सा मुसलमानों को दिए जाने का निर्देश था। हाईकोर्ट के इस फैसले को मुस्लिम समुदाय पहले ही सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दे चुका है। रामलला की ओर से भी उनके निकट मित्र ने अपील दाखिल कर दी है। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करने की समय अवधि आज समाप्त हो गई। भगवान राम की ओर से सोमवार 29 नवंबर को ही अपील दाखिल कर दी गई थी। दाखिल अपील में कहा गया है कि जब हाईकोर्ट ने यह मान लिया कि मुसलमानों का जमीन पर दावा नहीं बनता और इस बात के साफ साक्ष्य हैं कि पहले वहां उत्तर भारत की नगर प्रकृति का मंदिर था तो फिर जमीन के बंटवारे का आदेश देना ठीक नहीं है। जब एएसआई की खुदाई में साबित हो गया कि वहां पहले मंदिर था तो हाईकोर्ट को सुप्रीमकोर्ट के इस्माइल फारुखी केस के मुताबिक फैसला करना चाहिए था। अपील में कहा गया है कि जब एक बार जमीन को राम जन्मभूमि घोषित कर दिया गया है तो फिर उसे अंदर का हिस्सा बाहर का हिस्सा या केंद्रीय गंुबद आदि में बांटना असंगत है। यह भी कहा गया है कि जब वक्फ बोर्ड व अन्य लोग जमीन पर मालिकाना हक साबित करने में नाकाम रहे हैं तो फिर सिर्फ कब्जे के आधार पर उनका मालिकाना हक नहीं बनता। हाईकोर्ट का यह मानना गलत है कि कोई भी पक्षकार अपना मालिकाना हक नहीं साबित कर पाया क्योंकि फैसले में माना गया है कि ना जाने कितने समय से इस जगह को राम जन्म स्थान माना जा रहा है। कहा गया है कि वक्फ बोर्ड ने जमीन पर कभी मालिकाना हक का दावा नहीं किया उसने तो सिर्फ जमीन को सार्वजनिक मस्जिद घोषित करने की प्रार्थना की थी। इस अपील में न्यायमूर्ति खान और न्यायमूर्ति अग्रवाल के फैसले को चुनौती दी गयी है क्योंकि तीसरे न्यायाधीश न्यायमूर्ति डीवी शर्मा ने बाकी सारे मुकदमे खारिज करते हुए सिर्फ भगवान राम के हक में फैसला दिया था।
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