गुरुवार, 9 दिसंबर 2010

पत्रकारों को देख कर अयोध्या में बिफरी मुस्लिम महिला ..

बीते ६ दिसम्बर को अयोध्या में मेरे एक मित्र जो की हिंदुस्तान समाचार पात्र से जुड़े हुए है १९९२ के दंगे में दक्षिण पंथी अतिवादियो के शिकार हुए मुस्लिम परिवारों के वर्तमान हालत जानने के लिए उनसे मिलने गये थे वंहा उन्हें जिस हालत का सामना करना पड़ा वह काफी चौकाने वाला था वापस आने के बाद उन्होंने बताया था की किस तरह उनके वंहा जाने के बाद और उस बीते घटना चक्र का जिक्र करने के बाद टेढ़ी बाज़ार में रहने वाली महिला भड़क उठी थी की उन्हें किसी तरह भाग कर अपनी जान बचानी पड़ी थी हालत तो यह है की हिन्दू हो या मुसलमान अयोध्या में कोई भी अब इन सब बातो से अपना कोई वास्ता नही रखना चाहता सबको पता है की राजनैतिक पार्टिया उनसे जुड़े लोग बीएस अयोध्या के नाम पर अपनी दुकाने चलाना कहते है लेकिन अयोध्या का आम आदमी अब उनके लिए बिकने वाली चीज़ बने के लिए तैयार नही है विश्व हिन्दू परिषद् हो या बाबरी मस्जिद कमिटी सब का मूल बस अयोध्या के नाम पर राजनीत करना ही है

सच बताये तो मै तो पिछले १५ वर्षो से यही रहकर अनुभव कर रहा हूँ की अयोध्या का आम जनमानस कितना शांति प्रिये और भला है की पूरी दुनिया में हिन्दू मुसलमान के नाम पर कितना भी दंगा हो जाये पर अयोध्या के लोग अपनी पहचान हमेशा अलग ही बन्येया रखते है यही इस बार भी हुआ की ६ दिसमेर ऐसा गुजरा की किसी को पता भी नही चला न ही हर बार की तरह ६ दिसम्बर को अखबारों में पहले पन्ने पर जगह मिली सच में ये देखकर लग रहा है की हम परगति कर रहे है

समीर शाही

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