
इस युवती को गौर से देखिए। यह बिहार निवासी सोनी (18) है। लगभग साल भर पहले छत से गिरने से पीठ में गंभीर चोट आई और उसके दोनों पैर लकवाग्रस्त हो गए। लम्बे समय तक इलाज के बाद अब वह चलने में सक्षम है। सोनी के चेहरे पर जो मुस्कान है, उसके लिए डॉक्टरों के साथ वह व्यक्ति भी जिम्मेदार है जिसने उसकी मदद की। इस अनजान व्यक्ति ने सोनी के पैरों का सहारा बने उस उपकरण के लिए धनराशि दान की है, जिससे वह चल सकती है। उसके निर्धन पिता उपकरण खरीदने में अक्षम थे। सोनी ही नहीं सुहानी, कलावती, राजू, तीरथराम, गणेश और तनु जैसे जरूरतमंदों की मदद के लिए कुछ लोग निरंतर लिंब सेंटर में गुप्तदान कर रहे हैं। ये लोग यहां आकर जरूरतमंदों से मिलते हैं और जरूरत के हिसाब से उनके लिए कृत्रिम अंग, बैसाखी या उपकरण के लिए पैसे दान करते हैं। शर्त बस इतनी होती है कि उनका दान गुप्त रखा जाए। लिंब सेंटर के निदेशक प्रो.वीपी शर्मा ने बताया कि इन लोगों की मदद से साल भर में लगभग 250 जोड़ी बैसाखियां, सौ से अधिक कृत्रिम अंग और दर्जनों उपकरण जरूरतमंदों को मिल जाते हैं। बीती जून से लेकर अब तक 28,972 रुपये के उपकरण व अंग खरीदने के लिए गुप्तदान आया। इसमें कुछ अधिकारी, कुछ डॉक्टर, समाज सेवी संस्थाएं व सामान्य जन शामिल हैं।
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